आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज के 8 वें आचार्यपदारोहन एवं श्रुतपंचमीपर्व पर वेबसंगोष्ठी का आयोजन 27/05/2020
लुप्त होते नैतिक संस्कार, विलुप्त होते आदर्शों को पुनः जीवित करने के लिए गूगल मीट पर हुआ ज्ञान संस्कार शिविरों का उदघाटन
श्रुत पंचमी एवं आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के 8वें आचार्य पदारोहण दिवस पर हुए व्याख्यान
उत्साह से मनाया श्रुत पंचमी और आचार्य पदारोहण
👉श्रुतपंचमी पर्व ज्ञान की आराधना का महान् पर्व है : आचार्य श्री ज्ञानसागर
कोरोना से बचाव के उपाय बताए
(डॉ. सुनील संचय ललितपुर द्वारा रिपोर्ट)
बारां, राजस्थान। श्रुत पंचमी महापर्व एवं सुप्रसिद्ध दिगम्बर जैनाचार्य सराकोद्धारक आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज के 8वे आचार्य पदारोहण दिवस को लॉकडाउन के चलते गूगल मीट पर आयोजित वेबिनार के माध्यम से आयोजित किया गया। दस दिवसीय ऑनलाइन श्रुत संवर्धन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का भी इस दौरान ऑनलाइन उदघाटन किया गया। इसमें भारत के अनेक स्थानों से विशिष्ट लोगों ने भाग लिया। लॉकडाउन के चलते राजस्थान के कोटा के पास बारां में विराजमान सुप्रसिद्ध दिगम्बर जैनाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने गूगल मीट के माध्यम से वेबिनार में आशीर्वचन के माध्यम से सम्बोधित किया।
लॉकडाउन के चलते श्रुत पंचमी महापर्व एवं सुप्रसिद्ध दिगम्बर जैनाचार्य सराकोद्धारक आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज के 8वे आचार्य पदारोहण दिवस पर गूगल मीट पर आयोजित वेबिनार में जस्टिस अभय गोहिल ने कहा कि आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ज्ञान के सागर, ज्ञान के हिमालय, क्रांतिकारी संत हैं। वह मेरे प्रेरणास्रोत हैं। वे अनेक गुण सम्पन्न हैं।
मगध विश्विद्यालय में प्रोफेसर नलिन के शास्त्री बोधगया ने कहा कि आज का यह ऐतिहासिक दिन अद्भुत सुसम्योगों को समाहित कर रहा है| परम पूज्य आचार्यश्री के पदारोहण की वन्दना है, श्रुत की परम्परा के समुद्धारक आचार्यों की श्रृंखला की वन्दना है| जब सम्पूर्ण विश्व एक महामारी से ग्रस्त है , त्रस्त है, एक अनजाने भय से चिंतित है; वहीं पूज्यश्री की वन्दना कर हमें एक निर्मल आनंद की अनुभूति हो रही है।
अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद के अध्यक्ष एवं शिविर निर्देशक डॉ श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत ने जहां श्रुत पंचमी के ऐतिहासिक महत्त्व को रेखांकित किया वहीं आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के जैन साहित्य संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए अवदान पर प्रकाश डाला तथा विद्वानों के प्रति उनके वात्सल्यभाव को स्तुत्य बताया।
श्रुत संवर्द्धन संस्थान मेरठ के महामंत्री श्री हंस जैन मेरठ ने कहा कि पूज्य आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के उपदेश हमेशा जीवन समस्याओं की गहनतम गुत्थियों के मर्म का संस्पर्श करते हैं और जीवन को उसकी समग्रता में जानने और समझने की कला से परिचित कराते हैं।
👉वेबिनार का संचालन विदुषी बाल ब्रह्मचारिणी अनीता दीदी जी ने कुशलता पूर्वक किया।
👉अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद के महामंत्री एवं मुख्य शिविर संयोजक ब्र. जयकुमार जी निशांत टीकमगढ़ ने कहा कि
संस्कार शिविरों के माध्यम से पाश्चात्य की ओर बड़ रही युवा पीढ़ी को नैतिक शिक्षा देकर उन्हें संस्कारित करना उद्देश्य है। शिविरों के माध्यम से जहॉ बच्चे संस्कारित होंगे वहीं उनके अभिभावक भी संस्कारित होंगे। श्रुतपंचमी ज्ञान की आराधना का महापर्व है।
👉सुप्रसिद्ध जैन विद्वान और गणितज्ञ डॉ अनुपम जी जैन इंदौर ने आचार्यश्री की प्रेरणा से हो रहे विविध कार्यों पर प्रकाश डाला तथा उनकी प्रेरणा से अप्रकाशित बहुमूल्य ग्रंथो के प्रकाशन को स्तुत्य बताया।
👉सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ डी. सी. जैन जी दिल्ली ने कोरोना से बचाव के उपाय बताए।
👉शाकाहार प्रचारक डॉ कल्याण गंगवालजी पुणे ने कहा कि शाकाहार, अहिंसक जीवन शैली से कोरोना जैसी महामारी से बचा जा सकता है।
👉डॉ सुहास जी शाह मुंबई ने आचार्यश्री के मुम्बई प्रवास पर प्रकाश डाला।
👉राजेन्द्र महावीर सनावद ने कहा कि आचार्यश्री ने जिन जिन कार्यों की प्रेरणा दी है वस्तुतः आज उनकी अत्यंत जरूरत है। हजारों लोगों को उन्होंने व्यसन मुक्त बनाया है।
👉डॉ सुनील संचय ललितपुर ने बताया जैन परंपरा में श्रुत पंचमी पर्व का विशिष्ट महत्व है।जैन परंपरा का साहित्य भारतीय संस्कृति का अक्षय भंडार है । जैन आचार्यों ने ज्ञान -विज्ञान की विविध विधाओं पर विपुल मात्रा में स्व- परोपकार की भावना से साहित्य का सृजन किया। आज भी अनेक शास्त्र भंडारों में हस्तलिखित प्राचीन ग्रंथ विद्यमान हैं ।जिनकी सुरक्षा, प्रचार-प्रसार, संपादन, अनुवाद निरंतर हो रहा है।
👉प्रखर वक्ता मनोज जैन आगरा ने कहा कि श्रुत का संरक्षण मात्र अलमारी में बन्द कर और कभी कभी पूजन से नहीं होगा, उसका अध्ययन और आचरण करने से होगा। कोरोना महामारी से जैन समाज के लोगों में उपजी बेरोजगारी पर उन्होंने प्रकाश डाला।इसके लिए एक व्यापक नीति बनाने का सुझाव दिया।
👉पूज्य आर्यिका स्वस्तिभूषण माता जी, श्री आदीश जैन सीए, श्री हसमुख जैन इंदौर, मनीष जैन, संजीव सोगानी, स्वराज जैन (टाइम्स ऑफ इंडिया) दिल्ली,राकेश जैन दिल्ली, विपिन जैन, एडवोकेट सुरेंद्र मोहन जैन, रजनी जैन, मनीषा जैन, नीरज जैन, मृदुला जैन, कमल जैन, राजेश रागी, गजेंद्र जैन आदि गूगल मीट के माध्यम से वेबिनार में शामिल हुए।
👉वेबिनार में आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने कहा कि दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार प्रति वर्ष जेष्ठ शुक्ल पंचमी तिथि को श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाता है। इस दिन जैन आचार्य धरसेन के शिष्य आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबलि ने 'षटखंडागम शास्त्र' की रचना पूर्ण की थी। उसके बाद से ही श्रुत पंचमी को पर्व के रूप में मनाया जाने लगा। श्रुतपंचमी पर्व ज्ञान की आराधना का महान् पर्व है, जो मानव समाज को वीतरागी संतों की वाणी, आराधना और प्रभावना का सन्देश देता है।यदि शास्त्र नहीं होते तो हम उस प्राचीन इतिहास को नहीं जान सकते थे।मां जिनवाणी को संरक्षित करने, उसका हम संरक्षण और संवर्द्धन करने के लिए आगे आएं।
शिविर समिति के सह निर्देशक डॉ. सुनील संचय ने बताया कि लुप्त होते नैतिक संस्कार, विलुप्त होते आदर्शों को पुनः जीवित करने के लिए परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से 20 वर्षों से भारत के विभिन्न स्थानों पर शिविर आयोजित हो चुके हैं। पिछले वर्ष श्रुत संवर्धन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर जनपद सहित बुंदेलखंड के विभिन्न अंचलों में आयोजित हुए थे। लेकिन इसबार लॉकडाउन के चलते 27 मई से 05 जून तक ऑनलाइन इन संस्कार शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिसका विधिवत शुभारंभ आज गूगल मीट पर किया गया।
शिविर समिति के संयोजक मनीष जैन विद्यार्थी शाहगढ़ और चेतन जैन बंडा ने बताया कि उक्त शिविरों में ज्ञान दर्पण भाग 1, 2 छहढाला, भक्तामर स्त्रोत, तत्वार्थ सूत्र, द्रव्य संग्रह आदि की ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होंगी । अनेक सांस्कृतिक, धार्मिक प्रतियोगिताएं, कॅरियर काउंसलिंग तथा विशेष व्याख्यान भी होंगे । आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के तनाव मुक्त जीवन, शाकाहार जीवन शैली, व्यसनों से मुक्ति, नैतिक शिक्षा आदि पर ऑनलाइन विशेष मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
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